Monday, August 16, 2010

राष्ट्रीय ध्वज का महत्व.....

सबसे पहले तो आप सबको  स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं...व्यस्त होने के कारण यह पोस्ट डालने में थोड़ी देर हो गयी...         
हमें आज़ाद हुए ६३ साल हो गए...तब से लेकर आज तक हमारे देश में काफी बदलाव आए हैं... समय के साथ साथ हम लोगों की सोच भी बदल गयी है. आज भी जब उनलोगों के बारे में सोचता हूँ जिन्होंने अपनी जान दे दी ताकि यह देश आज़ाद हो सके तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं..किसी भी चीज के लिए जान दे देना वाकई में, मैं उस ज़ज्बे को झुक कर सलाम करता हूँ.....  बस दुःख इस बात का है कि आज की इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी के बीच वो ज़ज्बा कहीं खो सा गया है....        
एक वो दिन भी होगा जब आजादी के दीवाने अपने झंडे की इज्जत के लिए अपनी जान भी दे दिया करते थे, और आज राष्ट्रीय ध्वज अपनी पहचान और इज्जत खोता जा रहा है.. कल जब मैंने सुबह अपने कमरे से निकल कर  बाज़ार का रुख किया तो कुछ ऐसा नज़ारा दिखा कि सोच में पड़े बिना न रह सका...             
दुःख हुआ यह देखकर कि आज हमारे राष्ट्रीय ध्वज के लिए भी स्थान नहीं है...इस कचरे के ढेर के बीच यह झंडा कहीं न कहीं यह सवाल जरूर उठाता है कि आखिर हमारे राष्ट्रीय ध्वज का महत्व आखिर है क्या ????              अगर आज वो स्वतंत्रता सेनानी यह सब देख रहे होंगे तो उनका दिल कितना व्यथित हो गया होगा....

13 comments:

  1. बहुत ही शर्मनाक है !

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  2. sahi main bahut sharamnak hai.yeh sab dekhkar dil ander tak kachot jata hain.

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  3. Yes, it pains to see our national flag - our pride not given due respect.

    If organizers cannot ensure decent ambiance for DWAJVANDAN, they should not held one and join with some other group who can.

    Thanks for highlighting this.

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  4. kya kehoon..afsos hota hai...chaliye aapne isko hum sab tak pahunchaya...ye prayas sarahniy hai!

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  5. शर्म की बात है देशवासियों के लिए ....

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  6. Get your book published.. become an author..let the world know of your creativity or else get your own blog book!


    www.hummingwords.in

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  7. शेखर मेरे ब्लॉग पर हमेशा तुम्हारा स्वागत है। तुमने परिचय में लिखा है कि जबरदस्ती ईंजीनियरिंग करनी पड़ी। अब बन गए हो तो उसका आनंद लो। इसे देश सेवा के लिए इस्तेमाल कर सको तो ज्यादा खुशी होगी तुम्हारे कवि ह्दय को।
    अब बात मन के दुःखी होने की। सुमन निःसंदेह तिरंगे को इस हालत को देखकर दिल दुःखी हुआ होगा। पर एक बात बताओ तुमने क्या किया। वो जज्बा तुम्हारे पास भी तो होना चाहिए न। तिरंगे की लाज तो आसानी से रखी जा सकती थी। तुम कुछ दोस्तों के साथ मिलकर जिन लोगो ने तिरंगा फहराया था उन्हें समझा सकते थे। अगर वो झगड़ालू लोग हैं..और तुम ये जानते हो तो चुपचाप किसी टीवी चैनल वाले को और नहीं तो पुलिस को गुमनाम फोन तो कर सकते थे न मित्र। मानता हूं कि हर कदम पर रिस्क उठाना अच्छी बात नहीं। इससे समाज और देश का हित तो नहीं सधेगा....उल्टे अपने लिए मुसीबत हो सकती है। पर जिस काम को गुमनाम रह कर भी कर सकते हो उसे तो करते ना।

    ये जगह कौन सी है मुझे बताना....अगर अभी भी झंडा वहीं है तो जरा उसकी क्लिप बना कर भेजना.....

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  8. Behad sharmnaak hai yah dhrashya dekhar.. sach mein deshbhkti ka jajbe ka star nirantar gir rahai hai....
    Kash desh ko chalane wale shashan-prashan yah sab dekh paata!!

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  9. Shekher Bhaai.....Tirnage ka sammaan n karna unpardonable apradh hai. Jinhone bhi ye kiya hai mujhe unki budhhi par taras aata hai.

    AApne itne important issue ko apni post ka subject banaya. Iske liye aapko Bhadhaai....

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  10. bahut hi sarthak aur apne rashhtriy dhwaz ke baare me ekdam shai mulyankan karti yatharthpurn chitran.bahut hi achhe dhang se prastut kiya aapne.
    poonam

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  11. हम सारे भारतियों के लिए ये बहुत ही शर्मनाक है कि हमारे राष्ट्रिय ध्वज का इस तरह से अपमान किया जा रहा है! बेहतरीन प्रस्तुती!

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  12. बहुत ही दुख की बात है।

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  13. India that is Bharat, India shining!

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