Tuesday, April 13, 2010

वो लम्हें जो शायद याद न हों......

वो पहली बार,
जब माँ  ने गले से लगाया,
वो लम्हा जब पापा ने गोद में उठाया,
वो पहली मासूम सी हँसी,
वो पहली नींद की झपकी,
दादी की प्यार भरी पप्पी,
वो पहले लड़खड़ाते से कदम,
वो अनबुझ पहेली सा बचपन...
ढेर सारे खिलौने,
गुड्डों और गुड़ियों की दुनिया,
स्कूल में वो पहला दिन,
वो प्यारे पलछिन,
और भी ऐसा बहुत कुछ......
इस ज़िन्दगी की आपाधापी से,
इन वाहनों के शोर से,
कहीं दूर, कहीं एकांत में,
आओ बैठें, समेटे उन लम्हों को,
वो लम्हे जो बीत गए....
वो लम्हें जो शायद याद न हों......

Saturday, April 10, 2010

LIFE......


















Many a times we feel that...
Things are "Perfect..."
We pray to God...
"Please keep things like this only, forever..."
"Touch-wood"- This word comes in our mind, again and again...
But...
Life has its own "surprises"
It has its own "ups & downs"
As it is said...
"Morning comes after the dark night"
The opposite also exists...
"The dark, scary night also comes after the bright days..."
Things are never the same in one's life...

Thursday, April 8, 2010

तुम मुझे मिलीं....

यह कविता समर्पित है मेरी एक ख़ास दोस्त को जो जाने-अनजाने में ही कब  मेरी सबसे अच्छी दोस्त  बन गयी पता ही नहीं चला ..और हाँ सिर्फ दोस्त.....
तुम मुझे मिलीं....
निस्संग रास्ते में मित्र की तरह,
मित्रता की सरहद पर मिलाप की तरह
थकान में उतरती हुई नींद की तरह,
नींद में अपने प्राणों के स्पर्श की तरह,
तुम मुझे मिलीं....
सूखी  बंजर धरती पर बारिश की बूँद की तरह,
किसी माला में गूंथे हर-एक मोती की तरह,
घने वीरान जंगल में एक पगडण्डी की तरह,
तुम मुझे मिलीं...
कंटीली यादों के बीच कोमल पंखुरियों की तरह,
एक निराश कवि के भूले- बिसरे शब्दों की तरह....
तुम मुझे मिलीं.....
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