Friday, August 23, 2013

छोटी-छोटी चिप्पियाँ...

उस लम्हें में,
रात का स्याह रंग बदल रहा था 
तुम्हें याद तो होगा न 
चांदनी मेरा हाथ थामे
सो रही थी गहरी नींद में,
और रौशन कर रही थी 
मेरे दिल का हर एक कोना...

**********

वो दिन भी याद है मुझे,
जब कभी चुपके से 
तुम मुझे टुकुर-टुकुर 
ताक लिया करती थी,
जैसे मेरे वजूद की चादर हटाकर 
ढूंढ रही हो 
कोई जाना-पहचाना सा चेहरा,
तुम लाख मना करो 
पर तुम्हें था तो इंतज़ार जरूर किसी का
क्यूंकि वो दिन याद है मुझे
जब चुपके से तुम मुझे
टुकुर-टुकुर ताक लिया करती थी... 

**********

कभी-कभी 
खो जाता हूँ ,
मैं अपने स्वयं से बाहर निकलकर 
और देखता रहता हूँ
तुम्हें,
चुपचाप...

14 comments:

  1. :) bas smile karne ka mann karta h ye padh kar :)

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  3. कभी-कभी
    खो जाता हूँ ,
    मैं अपने स्वयं से बाहर निकलकर
    और देखता रहता हूँ
    तुम्हें,
    चुपचाप...

    प्रेम में वजूद परस्पर मिलकर एक हो जाता है
    बहुत खूब !

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  4. बहुत प्यारी, बहुत खुबसूरत :)

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  5. सबके मन की कहती चिप्पियाँ

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    :-)

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  7. कल 25/08/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  8. अस्तित्‍व को चांदनी का साथ मिला तो समझो प्रेम पक्‍का है।

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  9. Ye bhi ab tum karoge....!!! Ham kya karenge ab..??? Lekh likho tum, aisi killer nazmein is taraf courier kar do ;)

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  10. वाह, बहुत सुन्दर

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