Monday, March 21, 2016

माइनस इनफिनिटी....

तुम्हारे कुछ बाल 
इन कंघियों में कैद होकर रह गए हैं
उसी तरह जैसे मकड़ी
खुद कैद हो जाती है
कभी कभी
अपने ही बुने जाले में...

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ओझराए हुये इन धागों के कोने में,
एक हल्की सी गांठ बांध रखी है
तुम्हारे नाम की,
चाहे कितना भी लटपटा जाऊँ
ज़िंदगी की लटेर के ऊपर,
हमेशा ये सनद रहेगा
कि मेरा एक सिरा बांध रखा है
तुमने हमेशा हमेशा के लिए....

*********

प्रेम इन्फाईनाईट की तरह है,
चाहे तो किसी से जोड़ लो, घटा लो
गुना करो, चाहे तो भाग लगा लो,
आगे माइनस लगा के
चाहो तो माइनस इनफ़िनिटी कर लो,
लेकिन वो वैसे ही बना रहेगा
उसी अभेद्यता के साथ,
जैसे मिले हुये हों
दो शून्य आपस में
सदा सदा के लिए...

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