Wednesday, May 12, 2010

जाने क्यूँ उदास है मन.....

जाने क्यूँ उदास है मन,
जाने किस बात का है गम,
यादों के झरोखों से कुछ,
धुंधली तस्वीरें दिखती हैं,
गर्मियों के मौसम में भी,
आखें शीतल पाषाण सी लगती हैं,
ह्रदय कि कोमल धरा पर,
काँटों जैसा कुछ चुभता है,
किसी को व्यथित देखकर ,
जाने मेरा मन क्यूँ दुखता है,
इस बेबसी का अर्थ है क्या,
क्या कहते हैं ये रेत के कण,
जाने क्यूँ उदास है मन.....
जाने किस बात का है गम....

47 comments:

  1. लाजवाब रचना ....मन की भावनाओं को बड़ी नाजुकता से प्रस्तुत किया है .

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  2. सुन्दर ...
    उदासी के आलम को अच्छी तरह उभारे हैं आप !

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  3. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  4. मित्र इतनी सुन्दर रचना और गहरे शब्द कहाँ छुपा कर रखे थे ...........बहुत सुन्दर और अच्छी अभिव्यक्ति ...कुछ बेहद शानदार पंक्तीया है...हां पर उदास ना हो ..हम जो आपके साथ

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  5. एक बार नहीं , जाने कई बार आदमी जान नहीं पता अपनी उदासी का अर्थ, वह अव्यक्त अनकहा मन एक तलाश में खो जाता है. सबकी अपनी अपनी तलाश होती है

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  6. Familiar feelings. One overcomes soon...

    Thanks for putting it in words.

    Nice.

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  7. बहुत बार यूँ ही उदास हो जाता है मन....खोया खोया सा....फिर उस स्थिति से स्वयं ही बाहर भी आता है मन....

    मन की इस बेचैनी को बहुत सशक्त शब्द दिए हैं.....

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  8. ye man sach mein aseem chanchal hota hai...... vichitra hai iski harkat..... jis baaton se ye vyakul ho uthta hai, hu usi se apne apnon ko sambhaalne ki prayatna karte hain...... par akele baith unhi baaton se hum khud pareshaan ho uthte hain.....

    bilkul sachhi baatein prastut kiya hai udas man k baare mein aapne apni kavita k dwara.... uttam !!

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  9. कुछ ज़ख्म उँगलियों के पोरों से
    सहलाते रहे ज़िस्म मेरा
    मैं रफ्ता रफ्ता दर्द के आगोश में
    उतरता गया .......

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  10. touching lines....an sahi mai
    aisa bahut baar hota hai
    maan unhi udas ho jata hai
    bahut acche say shabdo may bayan kiya
    hai apne

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  11. ..पर अंकल आप उदास क्यों हो. लगता है कई दिन से कहीं घूमने नहीं गए..या फिर घर में डांट पड़ी है. कोई बात नहीं, अच्छे लोग उदास नहीं होते. हमेशा हंसते-मुस्काते रहते हैं. ...एक बात और, कहीं आप झूठ-मूठ में ही तो उदास नहीं हो. जल्दी से आप चाकलेट खिलाओ, फिर उदासी भाग जाएगी.

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  12. सच ही जब कभी मन उदास होता है ... यादों में डूब जाता है ... उदासी भारी दास्तान अच्छी लगी ......

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  13. बहुत ही सुन्दर कविता! दिल को छू लेने वाली लाजवाब कविता लिखा है आपने!

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  14. दिल से लिखी गई रचना ..........

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  15. Mere bhai.....
    Zindagi ka sath nibhate chalo...
    Har fiqr ko dhuen mein udate chalo...
    Achhi rachna hai!

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  16. kabhi kabhi apni udasi ka karan ham khud nahi samjh paate.bahut hi gaharai se apne dard ko aapne abhivykt kiya hai.
    poonam

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  17. बहुत प्रभावशाली
    http:// adeshpankaj.blogspot.com/
    http:// nanhendeep.blogspot.com/

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  18. बहुत ही शांत और सुकून में लिखावट..........
    शांत मान का एक दर्पण हैं ये कविता
    बधाई सर जी

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  19. उत्कृष्ट रचना । शीतल पाषाण पर ध्यान दें ।

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  20. bahut hi sundar dil ko chu lenevali rachna. aabhar.

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  21. khubsurat najuk khayal..sundar kavita.

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  22. सधे हुए शब्द और भाव सुंदर रचना

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  23. वाह!!!!!!!!!!!!!!! बहुत सुन्दर भाव समर्पित किये

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  24. Udas man ki vyatha ka sundar chaitran kiya hai aapne....

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  25. waah badi hi khoobsoorti se apne dard ko baya kiya badhai...

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  26. Shekhar bahut khoob...udasee or wo bhee dossre ka dard dekh kar..ye bataatee hai ki ham ab bhee insaan hain...badhiyaaaaaaa!!

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  27. नमस्कार...
    मन की संवेदना दुसरे के दुःख से मन को दुखी करती है...
    और कवी तो अति संवेदनशील होता है, तभी ज्यादा दुखी भी रहता है॥

    सुन्दर कविता...
    *************

    आज से मैं भी आपके अनुसरण मैं....
    दीपक शुक्ल...

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  28. Bahut achha likha hai!
    Picture and the content are very good...

    Dard hai ek alag sa... jo shabdo se mehsoos ho raha hai!

    Keep it up...

    Regards,
    Dimple

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  29. behtarin....kya likhte hain....wah...!!

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  30. सुन्दर अभिव्यक्ति है,बधाई
    हो।

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  31. udasi jazbato ko sunder shabdo me dhaala hai. bahut sunder rachna ban padi hai. badhayi.

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  32. adhuri baaten¤¤~~May 16, 2010 at 6:44 PM

    behad umda likha hai aapne, badhaai !






    amit~~

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  33. panktiyaan bhi sundar hai aur tasveer bhi!

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  34. http://bluestocking-bird.blogspot.com

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  35. it is small but has really deep meanings...all of us r worried by trifles of life...but these phases r never permanent...they come and depart like day & night...keep on writing such deep thoughts dude

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  36. ret kanon ka kahna pata chala ya nahi mitra.... :) achhi lagi reachna...

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  37. bahut sundar rachna
    abhar.....................

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  38. aap sabhi logon ka dhanyawaad........
    aapki anmol tippaniyon se prerit hokar hi aur likhne ke liye kalam uthti hai.....
    aabhaar.........
    shekhar

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  39. " sunder bhav purn rachana "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  40. हर बात दिल से निकली लगती है

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  41. Bahut sundar rachna...likhte rahiye!!

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