Saturday, June 25, 2011

थके हुए बादल...

कल अभिषेक भाई की एक कविता पढ़ी, एकदम निर्मल बारिश के रंगों से सरोबर..बस उसे पढ़कर कुछ टूटी-फूटी मैंने भी लिख डाली....



कुछ थके-हारे बादल मैं भी लाया हूँ,

यूँ ही चलते चलते हथेली पर गिर गए थे...
उन्हें यादों का बिछौना सजा कर दे दिया है

थोडा आराम कर लेंगे...
हर साल ये यूँ ही आते हैं झाँकने को,
तुम्हारी हर खिलखिलाहट के साथ बरसना
शायद इन्हें भी अच्छा लगता था..
अब तो जैसे ये यादें
टूटे पत्तों की तरह हो गयी हैं,
जिन्हें बारिश की कोई चाह नहीं...
शायद इन बादलों को भी
दिल का हाल मालूम है...
तुम्हारा आना अब मुमकिन नहीं
तभी मैं सोचा करता हूँ....
ये बारिश आखिर मेरे कमरे में क्यूँ नहीं होती ...

29 comments:

  1. This comment has been removed by the author.

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  2. शानदार!!
    बस ये बात अच्छी नहीं लगी - "कल अभिषेक भाई की एक कविता पढ़ी, एकदम निर्मल बारिश के रंगों से सरोबर..बस उसे पढ़कर कुछ टूटी-फूटी मैंने भी लिख डाली."

    कविता मेरी टूटी फूटी थी, आपकी तो शानदार है.

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  3. [co="red"]
    @अभिषेक भाई...
    जी नहीं.... मैं ये कतई नहीं मानूंगा.....
    [/co]

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  4. अब तो जैसे ये यादें
    टूटे पत्तों की तरह हो गयी हैं,
    जिन्हें बारिश की कोई चाह नहीं...
    बहुत सुंदर अहसास मुबारक हो

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  5. अरे नहीं ... आप यह भी कर लेते है ... भई वाह बहुत खूब !!!

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  6. बहुत बढ़िया रचना..

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  7. बहुत अच्छा सोचा है ......

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  8. तो बारिश का मौसम आ ही गया.

    कुछ थके-हारे बादल मैं भी लाया हूँ,
    यूँ ही चलते चलते हथेली पर गिर गए थे...
    उन्हें यादों का बिछौना सजा कर दे दिया है
    थोडा आराम कर लेंगे...

    बादल का मानवीय रूप बहुत हृदयस्पर्शी लगा.

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  9. सुमन जी,
    आपकी विशेषता है आप सभी की सुगंध समेटकर अपने घर ले आते हो और उसे अपनी भावनाओं के पंख दे उसे चारों ओर उड़ने को कहते हो.
    पसंद है आपकी ये सक्रियता.

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  10. बारिश चाहिए कमरे में , बच्चे तुमहरा जो हाल है न टाईम पे बियाह हो जाता तो , बारिश के साथ साथ कमरे में तूफ़ान भी आ जाता ..तब लिखते रहते न कविता तुम तो समझते

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  11. बहुत सुन्दर कविता...आभार...

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  12. ये बारिश आखिर मेरे कमरे में अब भी क्यूँ होती हैं ...

    कर दें तो फिर कैसा भाव आएगा ? जब वे नहीं तो फिर बारिस भी क्यों ?

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  13. बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने! उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  14. बहुत ही प्यारी कविता....

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  15. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (27-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  16. तभी मैं सोचा करता हूँ....
    ये बारिश आखिर मेरे कमरे में क्यूँ नहीं होती ...
    शुभकामनायें आपको !

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  17. waah ..shekhar achhi kavita bani hai.....geeli geeli c

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  18. यादों से घिरा हुआ मन ...
    बरसात के साथ ...भीनी भीनी यादें ...!!
    सुंदर रचना ..!!

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  19. [co="green"]
    .आदरणीय अरविन्द मिश्रा सर...
    अच्छी पंक्ति सुझाई आपने, लेकिन इस कविता का भाव यही है कि ये बारिश आजकल इसलिए नहीं होती कि वो नहीं है....
    अगर बारिश होतो तो जरूर कहता कि अब ये बारिश क्यूँ होती है....
    खैर, बहुत बहुत शुक्रिया....
    [/co]

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  20. [co="blue"]
    आदरणीय प्रतुल जी,
    आप तो मुझे हमेशा शर्मिंदा कर देते हैं...
    [/co]

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  21. बहुत सुन्दर...बधाई

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  22. अरे भाई लिखे तो हो बहुत शानदार ...वाकई में....सीना चौड़ा कर सकते हो हमारी सबासी के बाद .;..
    तुम्हारा आना अब मुमकिन नहीं
    ये तुम्हारा कोंन है ? बड़ा सवाल है..
    ख़ैर कोई भी हो छोड़ो मुझे क्या उससे हमें तो तुमसे लेना देना है ....
    तो देखो कविताई इतनी शानदार किये हो की ,,.
    बस उसे मेल कर दो तुम..
    वो बादलों पर सवार होके तुम्हारे पास दौड़ी चली आएगी....
    समझे की नहीं ..
    उठो जल्दी से मेल करो ...वरना......

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  23. बहुत ही प्यारी कविता....

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  24. करीब १५ दिनों से अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  25. आज दोबारा पढ़ा ..... इतना अच्छा लगा कि फ़िर से तुम्हारी तारीफ़ करने आ गयी .....शुभकामनायें !

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