Sunday, May 13, 2012

मेरी माँ थोड़ी अलग सी है...

            जानता हूँ इस पोस्ट का शीर्षक कई लोगों को अजीब सा लगेगा, आखिर ऐसी क्या अलग बात है मेरी माँ में... लेकिन माँ की जो सूरत अपने आस पास के लोगों से देखी, जैसी ममता, जैसे अपनेपन की बात सभी करते हैं वैसा कुछ भी मैंने अपनी निजी ज़िन्दगी में महसूस किया हो ऐसा नहीं है... हालांकि माँ तो सभी की अपने बच्चों से उतना ही प्यार करती है, लेकिन सभी अपना प्यार जतला सकें ऐसा नहीं है...
            मेरी माँ भी कुछ ऐसी ही हैं, उनके वर्किंग वुमेन होने का असर हमारे लिए मिलने वाले समय पर पड़ा... कभी फुर्सत में बैठ के बातें करना, दुलारना, पुचकारना शायद हमारी किस्मत में नहीं था... अलग दुनियादारी, अलग जिम्मेदारियां और ढेर सारा काम... मैं भी हमेशा अपने आस पास अपने दोस्तों की माओं को देखता था तो मेरा भी मन करता था कि कभी मेरी माँ भी इसी तरह मुझे प्यार से बेटा कह कर गले से लगा ले, आखिर किसका मन नहीं करता लेकिन ऐसा कोई पल कभी मेरी ज़िन्दगी में न आ सका... कितनी ही बार मन किया माँ की गोद में सर रख कर सो जाऊं... लेकिन कभी कभी ज़िन्दगी अपनी कुछ परिभाषाएं छुपा लेती है, और इसे मेरी बदकिस्मती समझूं या फिर नियति ज़िन्दगी का सबसे खुबसूरत एहसास ही छुप गया मुझसे... आखिर ज़िन्दगी का होना और उसका यूँ फलना-फूलना माँ के प्यार के बिना भला क्या मायने रखता है... लगता था मेरी माँ मुझे प्यार ही नहीं करती... शायद इसी डर से कि कहीं वो मुझसे दूर न चली जाए मैं ह्मेशा उनका आँचल पकडे चला करता था...
           जब धीरे धीरे बड़ा हुआ, थोडा समझदार(?) हुआ तब लगा कि वो प्यार तो ज़रूर करती होंगी लेकिन उन्हें जतलाना नहीं आता... फिर भी इस बात को कई सालों तक मैं एक्सेप्ट नहीं कर सका, आज भी कभी कभी जब अपने आस पास किसी माँ को अपने बच्चे से प्यार से गले लगाते हुए देखता हूँ तो आखें नम हो जाती हैं... कभी माँ के बारे में कुछ लिखने का सोचता हूँ तो वो एहसास नहीं ला पाता अपने शब्दों में, वो कुछ मैं महसूस ही नहीं कर सका कभी...कई बार माँ की बहुत याद आती है और रह रह कर लिखता भी रहा उनके बारे में...
           आज मदर्स डे पर और कुछ  कहने को नहीं है बस यही बात कि माँ मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ, लेकिन आपके प्यार के लिए हमेशा तरसता रहा... हैप्पी मदर्स डे.... 

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