Friday, September 7, 2018

तुम प्यार करोगी न मुझसे

तुम प्यार करोगी न मुझसे,

तब, जब मैं थक के उदास बैठ जाऊँगा
तब, जब दुनिया मुझपे हंस दिया करेगी
तब, जब अँधेरा होगा हर तरफ
तब, जब हर शाम धुंधलके में भटकूँगा मैं उदास

तब एक उम्मीद का दिया जगाये
तुम प्यार करोगी न मुझसे...

तब, जब मुझे दूर तक तन्हाई का रेगिस्तान दिखाई दे 
तब, जब मेरे कदम लड़खड़ाएं इस रेत की जलन से 
तब, जब मैं मृगतृष्णा के भंवर में फंसा हूँ 
तब, जब इश्क़ की प्यास से गला सूख रहा हो मेरा 

तब अपनी मुस्कान ओस की बूंदों में भिगोकर 
तुम प्यार करोगी न मुझसे...

तब, जब ये समाज स्वीकार नहीं करे इस रिश्ते को
तब, जब प्रेम एक गुनाह मान लिया जाए
तब, जब सजा मिले हमें एक दूसरे के साथ की
तब, जब मुँह फेर लेने का दिल करे इस दुनिया से

तब इस साँस से लेकर अंतिम साँस तक
तुम प्यार करोगी न मुझसे... 

Sunday, September 2, 2018

बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में...

बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में,
नफरत से कहीं धीमी...

नफरत इतनी कि
सड़क पर अपनी गाड़ी की
हलकी सी खरोंच पर भी
हो जाएँ मरने-मारने पर अमादा,

और मोहब्बत इतनी भी नहीं कि
अपने माँ-बाप को लगा सकें
अपने सीने से
और कह सकें शुक्रिया...

बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में,
नफरत से कहीं धीमी...

मोहब्बत सिगरेट की फ़िल्टर सी है,
नफरत का सारा धुंआ खुद से होकर गुजारती है
सारी नफरत ले चुकने के बाद
हम उस मोहब्बत को ही फेक देते हैं
और कुचल देते हैं
अपनी जूतों की हील से
और नफरत !!
वो तो समा चुकी है हमारे सीने में टार बनके...

बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में,
नफरत से कहीं धीमी...

Thursday, March 22, 2018

बस एक बेहतर कल की तलाश में...

मैं घिसता हूँ खुद को हर रोज,
खुद को खुद से आगे निकालना चाहता हूँ,
ये रगड़ एक आग पैदा करती है
मैं अकेला बैठ कर जल जाता हूँ हर शाम उसमें...
थक कर, घायल होकर
सवाल फिर खुद से ही करता हूँ
कि क्या ज़रुरत है इस संघर्ष की
दिल भी कन्धा उचका कर दे देता है जवाब,
"शायद बस एक बेहतर कल की तलाश में..."

मैं निराश होता हूँ क्यूंकि
मैं वो नहीं बन पाया
जो शायद बनना ज़रूरी था मुझे,
फिर भी मैं हर रोज लड़ता हूँ
निराशा को दरकिनार करता हूँ,
"शायद बस एक बेहतर कल की तलाश में..."

मेरे पास हर उस कल के सपने हैं,
जो कल नहीं आया अब तक
पता नहीं वो कल कभी आएगा भी या नहीं,
मेरे तले ज़मीं भी रहेगी या नहीं तब तक...

मेरा आज मुझे धिक्कारता है
क्यूंकि मेरा आज कभी आने वाला कल था
जिसकी फ़िक्र मैंने कभी नहीं की
और अब मैं अपना आज गंवा बैठा हूँ
"शायद बस एक बेहतर कल की तलाश में..."

ज़िन्दगी से कई सवाल हैं मेरे,
मैं नोटबुक में लिखता रहता हूँ
जो कभी उस दुनिया में कभी सामना हुआ तो
पूछ पाऊं उन सवालों को
फिलहाल तो आज बस मैं सवाल ही लिखता जा रहा हूँ
"शायद बस एक बेहतर कल की तलाश में..."

लगता है कि शायद कभी
किसी मोड़ पर गर
पर्दा गिराना हो इस ज़िन्दगी के नाटक से
तो क्या वो भी कर लूंगा मैं,
"शायद बस एक बेहतर कल की तलाश में..."

Friday, February 9, 2018

कसक...

कभी-कभी बैठे बैठे अचानक से हम दूर कहीं पीछे छूट चुकी याद के सिरे टटोल बैठते हैं... आज ऑफिस से वापस आते हुए कोई पुराना सा लम्हा आकर मेरी आखों के सामने पसर गया... 

इस खुशनुमा मौसम में अचानक से कसक सी उठी, तुमसे बात न कर पाने की कसक... मुझे नहीं पता कि ऐसा क्या है जो वो सुकून नहीं भूल पाता जो हर उस इंसान के साथ रह के मिलता जिसे मैं पसंद करता हूँ. मैं अपनी ज़िन्दगी के सबसे प्यार भरे दौर में हूँ और मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि मैं बहुत खुश हूँ इन दिनों... मुझे यकीन है जैसे मैं तुम्हें खुश देखकर खुश होता हूँ, तुम भी ज़रूर होगी... याद है तुमने एक बार कहा था "आप जहाँ भी, जिसके साथ भी रहेंगे हमेशा खुश रहेंगे और उसे भी रखेंगे जिसको ये खुशनसीबी हासिल होगी..." मैं शायद उस वक़्त नादान था बहुत, कभी सोचा नहीं था कि ये बात आज 16 सालों बाद भी मुझे याद आ जायेगी... कितनी सच थी ये बात, आज मैं सच में बहुत खुश हूँ और यकीन है उस इंसान को भी वो सारी ख़ुशी दे रहा हूँ जिसकी उसने तमन्ना की हो... सच कहूँ तो तुम्हारे यूँ अचानक से चले जाने का असली दुःख ये है कि मैंने एक बेहतरीन दोस्त भी खो दिया, वो दोस्त जिसके पास मेरी हर बकवास सुनने का वक़्त था और मेरी हर गलती सुधारने का भी... 

तुम्हारी उस "हर कोई धोखेबाज है इस दुनिया में.." वाली बात पर जब मैंने कहा कि मैंने तो कभी किसी को धोखा नहीं दिया कभी, तो तुमने कहा था.. "आप तो यूनिक टाइप हैं, आपको तो यही नहीं पता कि धोखा कैसे देते हैं, आप क्या धोखा दीजियेगा किसी को..." तुमने ये भी तो कहा था कि "अपने तरह का मत खोजिएगा कभी, पता नहीं शायद कभी मिले ही नहीं..." मैं आज तुमको बताना चाहता हूँ कि ऐसा कोई मिल गया है मुझे... उसे भी नहीं आता है किसी को धोखा देना... 

मैं फिर से उस इंसान से मिलना चाहता हूँ जिससे 17 साल पहले मिला था, बस इसलिए कि कुछ चीजों को रीसेट कर सकूं... बस इतना ही कि हम कम से कम ऐसे तो बने रहें कि आज तुमको बता सकूँ कि मैं खुश हूँ... 

मालूम है, ऐसा कुछ अब नहीं हो सकता... 

Sunday, November 5, 2017

अपने सबसे प्यारे दोस्त को ताउम्र खुश रख पाने का सुख.....

कभी-कभी लगता है जैसे मैं कई सारे झूठे-सच्चे सपनों का सौदागर हूँ... अब तो इस बात से फर्क भी नहीं पड़ता कि कितने सपने पूरे हो रहे हैं और कितने अधूरे छूटते जा रहे हैं.... कभी मैंने खुद ने कभी इन हालातों ने न जाने कितने सपनों को पीछे छोड़ दिया और आगे बढ़ गए... फिर भी मैं हर रोज एक सपना देखता हूँ और पूरी शिद्दत से उसे पूरा करने में जुट जाता हूँ... कितनी ही बार ऐसा हुआ कि जैसे पूरी कायनात ने किसी सपने को पूरा करने की राह में रोड़े अटकाए हों लेकिन मैं भी किसी मंझे हुए फुटबॉल खिलाड़ी की तरह ड्रिबल करते हुए अपने सपनों को गोल पोस्ट की तरफ लिए चले जाता हूँ... मुझे मेरे सपनों से अलग करना वैसे ही होगा जैसे शिकंजी से चीनी निकालना... इन सारे सपनों को मैं किसी अन्तरिक्ष यान में छोड़ देना चाहता हूँ, ताकि ये सारे सपने अनगिनत ध्रुव और परिधि बनाकर तुम्हारे आस-पास चक्कर काटते रहें... मुझे पता है, कभी जो कोई सपना अगर उल्का बन गया और खूब तेजी से तुम्हारी तरफ बढ़ेगा तो तुम दोनों हाथ पसारे उसे अपने सीने से लगा लोगी, ठीक वैसे ही जैसे जब हम कई दिनों बाद मिलते हैं तो तुम खूब जोर से मेरे सीने से चिपट जाती हो... जैसे ही वो उल्का बना सपना तुमसे लिपट जाएगा, तुम्हारे मन के आसमां में ढेर सारी रौशनी पसर जायेगी और उस रौशनी में तुम देखोगी कि मैं वहीँ खड़ा तुम्हारे लिए और ढेर सारे सपनों के समंदर बुन रहा हूँ... 

तुम्हारी ये खिलखिलाती सी मुस्कुराहटें, हज़ारों बहते हुए समन्दरों पर मेरे ख़्वाबों का आपतन बिंदु है... जब तुम हंसती हो तो मुझे इस दुनिया की सारी बंदिशों के खिलाफ जाने का दिल करता है, जैसे तुम्हारे चेहरे पर आने वाली हर मुस्कान के लिए ऐसे हर जहाँ हर बार कुर्बान... बहुत साल पहले मुझसे किसी ने कहा था कि मैं डूब कर मोहब्बत करता हूँ, पर मुझे लगता है जो डूब ही न पाए वो मोहब्बत ही कहाँ है भला... 

तुम जब भी मुझसे पूछती हो न कि "मैं क्या कर रहा हूँ..." और मैं जवाब दे देता हूँ, "कुछ नहीं... "
मेरा ये "कुछ नहीं..." समझ लो एक खाली गुल्लक है, जिसमे तुम अपने ख़्वाबों के सिक्के डालती जा सकती हो ता उम्र... इस गुल्लक से आती हुयी खनखनाती सी आवाज़ के भरोसे ही तो मेरी सांस चलती है इन दिनों..  ये "कुछ नहीं..." ही सब कुछ है मेरे लिए क्यूंकि इस "कुछ नहीं... " से ही मैं अपना "सब कुछ" तुम्हारी इन छोटी-छोटी हथेलियों में डाल के सुकून से चल सकता हूँ उन अनगिनत जन्मों के सफ़र पर तुम्हारे साथ.... 

इस दुनिया में कई सारे सुख हैं लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा सुख है अपने सबसे प्यारे दोस्त को ताउम्र खुश रख पाने का सुख.... 
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...