Thursday, March 10, 2011

ये देखकर आप मुस्कुराये बिना न रह सकेंगे....

मुझे गिलहरी बहुत अच्छी लगती हैं.. ये तस्वीरें देखी, अच्छी लगीं तो मैंने यहाँ लगा दीं.... 

 

Wednesday, March 9, 2011

क्या किसी परीक्षा का परिणाम आपकी ज़िन्दगी से ज्यादा कीमती है ? Students Suicide..

                परसों शाम में एक बहुत ही दुखदायी खबर मिली, मेरे इंजीनियरिंग कॉलेज की पंजाब शाखा में पढने वाले प्रथम वर्ष के एक छात्र  ने आत्महत्या कर ली, वजह ख़राब रिजल्ट | मात्र १९ वर्षीय पटना के इस छात्र ने शायद कुछ ज्यादा ही हताश होकर ये कदम उठा लिया | भगवान् उसकी आत्मा को शान्ति दे | लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर क्यूँ ???
        ( ये चित्र फिल्म ३ IDIOTS से लिया गया है )       

                आत्महत्या, ये शब्द कोई नया नहीं है | सदियों से लोग आत्महत्या करते आये हैं, बस परिस्थितियाँ बदल गयी हैं... पहले एक गरीब किसान या मजदूर अपनी गरीबी या भुखमरी से तंग आकर आत्महत्या करता था और आज भारत के श्रेष्ठ संस्थानों में पढने वाले युवा एक ज़रा सी नाकामयाबी से तंग आकर अपनी ज़िन्दगी ख़त्म करने जैसा कदम उठा लेते हैं | अरे आत्महत्या तो चंद्रशेखर आज़ाद ने भी की थी, लेकिन क्या उस परिस्थिति की तुलना आज के परिपेक्ष्य में की जा सकती है ???
                छात्रों और छात्राओं की आत्महत्या की बढती घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण है आगे निकलने की होड़, लगातार बढती ये प्रतिस्पर्धा हमारे दिमाग पर इतना प्रभाव डाल रही है कि एक ज़रा सी असफलता और हम उत्साह खो देते हैं...
                वैसे मेरा निजी विचार ये है कि बच्चे अपने रिजल्ट से नहीं बल्कि उसका प्रभाव उनके घर में क्या होगा इस डर में आत्महत्या करते हैं.... आज के समय में माता-पिता कुछ ज्यादा ही सख्त होते जा रहे हैं.... बच्चों को विश्वास में रखना जरूरी है... 
                मैं अभी भी विद्यार्थी जीवन से ही गुजर रहा हूँ इसलिए इस हताशा को समझ सकता हूँ, लेकिन इस हताशा को इतना भी बढ़ने नहीं दिया जाए कि आत्महत्या की नौबत आये... अपने लिए कुछ हलके फुल्के लम्हें तलाश करें, अगर आपका कोई शौक हो तो उसको भी थोडा समय दें... बाकी आप लोग खुद समझदार हैं...
               
                अंत में सभी माता-पिताओं से भी एक गुज़ारिश करना चाहूँगा, अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोडा समय अपने बच्चों के लिए भी निकालें, अपनी आकाँक्षाओं और सपनों का बोझ उनपर न डालें.. उनको भरोसे में लें, उनको ये विश्वास दिलाएं कि किसी भी परीक्षा का परिणाम उनकी ज़िन्दगी से ज्यादा कीमती नहीं है | याद रखें ये ज़िन्दगी अनमोल है, और इसको संभाल कर रखने में उनकी मदद करें......

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चलते चलते ये गीत भी सुन लें...

Monday, March 7, 2011

क्या आप भी अपने आपको इन नेताओं से बेहतर समझते हैं ???

                आपको कई लोग नेताओं को गाली देते हुए नज़र आ जायेंगे | इनमे से वो लोग भी हैं जो खुद या तो घूस लेते हैं या देते हैं.. शायद आप भी उन्ही में से हों...कभी न कभी मैंने भी ये काम ज़रूर किया है... क्या हम लोग भ्रष्ट नहीं है ????

                 क्या आप अपने को इमानदार समझते हैं ???? चलिए मैं आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ और ये अपने आप साबित हो जायेगा कि आप भी उन नेताओं से किसी मामले में कम नहीं है  और हाँ इन सवालों का जवाब आप मुझे नहीं अपने आप को दें...

                 १. क्या आपने अपनी ज़िन्दगी में कभी रिश्वत नहीं ली ??( ये प्रश्न उन लोगों के लिए है, जिन्हें ऐसा मौका मिला हो लेकिन इमानदारी के कारण ऐसा न किया हो ).. याद रहे रिश्वत, रिश्वत होती है चाहे १०० रुपये की हो या १० लाख की...
                 २. अब आते हैं काले धन की तरफ, नेताओं का काला धन तो सब को नज़र आता है लेकिन क्या आप उसमे सहयोग नहीं करते ??? ज़रा सोचिये हम दिन भर में न जाने कितने ही सामान खरीदते हैं उनमे से कितने की रसीद लेते हैं, याद रहे बिना पक्की रसीद के आपके द्वारा खरीदा हुआ हर सामान काले धन को बढ़ा रहा है...  (इस कैटेगरी में भारत के लगभग शत-प्रतिशत लोग आते हैं)...
                 ३. आपमें से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिनके सामने कभी न कभी कोई अपराध हुआ हो, आपमें से कितने लोगों ने इसकी गवाही पुलिस थाने में दी है ??? सब अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. (अपराध को देख कर मुँह मोड़ लेना भी उतना ही संगीन अपराध है)...
                 ४. अगर कुछ नैतिक मूल्यों की बात करें जैसे दहेज़ प्रथा, जाति के नाम पर वैमनस्य, आदि तो बाकि बचे खुचे लोग भी आ जायेंगे...
                 
                 और भी कितने ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आपको मुझे नहीं अपने आपको देना है... 
                 मेरे एक सज्जन मित्र कहते हैं कि सभी नेताओं को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए, लेकिन मेरे ख्याल से १२५ करोड़ भारतीयों में से ९० करोड़ लोगों को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए (बाकी के बच्चे हैं).. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी... हाँ निश्चित रूप से इतने लोग तो भ्रष्ट हैं ही भारत में.. चाहे वो सड़क चौराहे पर २० रुपये लेता ट्रैफिक हवलदार हो या अरबों रुपये के घोटालेबाज नेता...
                 क्यूँ न हम पहले अपने आप को सुधार लें देश अपने आप सुधर जायेगा....
                 अगर इन सवालों के बाद भी आपको लगता है कि आप इमानदार हैं, तो सोच क्या रहे हैं ... आईये राजनीति में आईये, इस देश को आपके जैसे नेताओं की ज़रुरत है....

                   Disclaimer :- मैं अपने आपको कतई ईमानदार नहीं समझता इसलिए नेताओं की बुराई करने में भी थोडा पीछे ही रहता हूँ.. देश को सुधारने से पहले खुद को सुधारने का प्रयास अनवरत ज़ारी है...

Friday, February 25, 2011

ममता बनर्जी से मेरी अपील....

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आज फेसबुक पर अपना स्टेटस और उसपर कमेन्ट लिखते लिखते लगा कि ये तो एक पोस्ट बन गयी.... तो सोचा यहाँ भी डाल ही दूं.. तो उसमे बिना कुछ जोड़े या घटाए पेश है ये चटपटी पोस्ट....
              मेरे फेसबूकिये दोस्त झेल चुके हैं आप भी झेलिये....
           हमारे पूजनीय नेताओं ने बज़ट सत्र के दौरान कहा कि भारत में भी टूरिस्ट ट्रेन चलनी चाहिए.
अमा यहाँ टूरिस्ट ट्रेन चलानी की ज़रुरत क्या है.. यहाँ तो एक्सप्रेस ट्रेन भी इतनी मस्तानी चाल से चलती हैं कि आप हर स्टेशन की खूबसूरती का मज़ा उठाते हुए अपना सफ़र पूरा कर सकते हैं.
कितनी अजीब बात है, एक तरफ जहाँ विश्व भर में २५०-३५० km की रफ़्तार से रेलगाड़ियाँ दौड़ती हैं वहीँ भारत की सबसे तेज ट्रेन भी बामुश्किल १०० का आंकड़ा छू पाती है.
              केवल ट्रेन की संख्या बढ़ाई जाती है हर बार....कभी गति बढ़ाने के बारे में कोई विचार नहीं होता.... अंग्रेज जैसा छोड़ कर गए थे सब कुछ वैसा ही है...
              आज का रेल बज़ट देखने के बाद ममता बनर्जी से मेरी कुछ गुज़ारिश है....  

१. ममता जी दोमंजिला ट्रेन चला रही हैं... हम तो कहते हैं अपार्टमेन्ट ट्रेन चलायी जाएँ... ताकि लोग अपने बिस्तर और रसोई के साथ सफ़र कर सकें....
२. हरियाणा सड़क परिवहन की तर्ज़ पर ट्रेन को भी हर घर के दरवाज़े से होते हुए पास कराया जाए...
३.बिहार सड़क परिवहन की तरह हर खिड़की के शीशे फोड़ दिए जायें, और सभी सीटों के गद्दे उखाड़ दिए जाएँ...
४.उत्तर प्रदेश बस की तरह देरी होने पर बस ड्राईवर और खलासी(गार्ड) को पीटने की इज़ाज़त दी जाए
५. कोलकाता की बसों की तरह ट्रेन के इंजन भी कम से कम ६० साल पुराने होने चाहिए ताकि उनसे ज्यादा से ज्यादा धुवाँ निकल सके...
६. डीटीसी की बसों की तरह ही ट्रेन को भी किसी को कुचल के आगे बढ़ने की आजादी मिले....
७. पंजाब रोडवेज की तरह ट्रेन ड्राईवर को भी शराब पीकर ट्रेन चलाने की इजाजत दी जाए ताकि गाडी की चाल और मस्तानी हो जाए....
८. बंगाल को इतनी रेलगाड़ियाँ देने के बाद एक ट्रेन आप अपने घर तक भी ले जा सकती हैं....
 =========================================================             Disclaimer :- ये सिर्फ मेरी निजी गुज़ारिश है अगर इससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो क्षमाप्रार्थी हूँ...
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Friday, February 18, 2011

आतंक के साए में....... राग तेलंग

चश्मा उतारता हूं
धुंधली हो जाती है दुनिया

ऐसा लगता है

बारूदी धुएँ से अटा पड़ा है सब कुछ

चीज़ें साफ़ नज़र नहीं आतीं

जैसे अभी-अभी हुआ है विस्फोट
क्षत-विक्षत लाशें चलती हुईं दिखती हैं

स्त्रियों-बच्चों के भय से स्वर मिलाकर

जो कहना चाहता हूं अटक जाता है गले में ही

बेरहम तंत्र

मेरे सामने जो नोट फेंक जाता है
उसमें से बाहर निकलकर आता है
एक बूढ़ा क्रांतिकारी
झुककर देता है मुझे मेरा चश्मा
कहता है
`सत्यमेव जयते को फिर से पढ़ो और नया कुछ गढ़ो´ ।

.....रचनाकार
            राग तेलंग.. 

         साथ में एक ख़ूबसूरत सी प्रार्थना, आप भी सुनिए...
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