कभी-कभी मैं
लेकर पंछियों से पंख
नीले गगन में विचरता हूँ
यूँ ही
शायद तलाश है किसी चीज की
हाथ में एक हाथ लेकर
आसमां की खाक छानता हूँ
उसे ढूँढता हूँ जो
ज़मीं पे मिलना कठिन हो चला है,
मगर खाली हाथ लौट आता हूँ
और वो हाथ भी छूट जाता है,
फिर कभी कभी
ज़मीं पे बसी दुनिया में
करता हूँ प्रयत्न
वो करने का
जो आसमान में होता है,
तभी एक नश्तर सा चुभता है
और थक कर गिर जाता हूँ
फिर उठता हूँ और
चल पड़ता हूँ आसमां की सैर पर
बस यूँ ही कभी कभी ||
Monday, November 1, 2010
Sunday, October 31, 2010
इनको पहचानिए तो ज़रा....
पिछली पोस्ट की बातों को भूल कर ज़रा ज्ञान की बात हो जाए | क्या आप पहचान सकते हैं इनको ??? कोशिश तो कीजिये | जल्दी से पहचानिए और बता दीजिये...और हाँ पोस्ट पर मोडेरेशन लगाया गया है , शाम तक टिप्पणियाँ प्रकाशित कर दी जाएँगी...
एक और तस्वीर दे दी, अब तो कोशिश करें..इनके ऊपर कई चर्चाएं पढ़ी हैं मैंने ब्लोग्स पर | ये बिहार के काफी प्रसिद्ध रचनाकार हैं...
एक और तस्वीर दे दी, अब तो कोशिश करें..इनके ऊपर कई चर्चाएं पढ़ी हैं मैंने ब्लोग्स पर | ये बिहार के काफी प्रसिद्ध रचनाकार हैं...
Saturday, October 30, 2010
लानत है ऐसे लोगों पर....
पिछले दिनों ब्लॉग जगत पर मैंने अजीब सा माहौल देखा | एक दूसरे की निंदा करने की जैसे प्रथा चली हुई थी | ऐसा लग रहा था मानो कोई होड़ लगी हुई है कि सबसे ज्यादा विवादास्पद और नफरत से भरा लेख किसका हो | हिन्दू का ब्लॉग है तो उसपर मुसलमान की बुराई हो रही थी और किसी मुसलमान के ब्लॉग पर हिन्दुओं पर निशाना साधा जा रहा था | कई पोस्ट तो मैंने ऐसी भी पढ़ी जो किसी व्यक्ति विशेष की बुराई करने के लिए ही लिखी गयी थी | ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ब्लॉग जगत में पढ़े लिखे और बुद्धिजीवी लोग रहते हैं | एक दूसरे के प्रति अपने मन में इतनी नफरत भर रखी थी और वो भी बिना किसी उचित कारण के | किसी को अपनी टिपण्णी प्रकाशित नहीं होने का गुस्सा था तो किसी को दूसरे की टिप्पणियाँ अच्छी नहीं लग रही थी |
चलिए इन व्यक्तिगत हमलों कि बात छोड़ भी दें लेकिन देश के खिलाफ...!!! जब से अयोध्या का फैसला आया है तब से सांप्रदायिक पोस्ट कुछ ज्यादा ही पढने को मिल रही है | धर्म के पीछे तो जैसे लोग पागल हुए जा रहे हैं |
अरे लानत है ऐसे लोगों पर जो इतने पढ़े लिखे होने के बावजूद इतनी संकरी विचारधारा से ग्रसित हैं |
लानत है ऐसे लोगों पर जिन्हें लिखने के लिए और कोई विषय नहीं मिलता | क्या इनके लिए धर्म इतना महत्वपूर्ण है कि इसके आगे वो इंसानियत के बाकी सारे धर्म भूल जाते हैं |
लानत है ऐसे लोगों पर जिन्हें इस देश में फैली हुई अशिक्षा नहीं दिखाई देती, वो भ्रष्ट नेता नहीं दिखाई देते जो दिल्ली में हुए खेलों के नाम पर ७०००० करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं |
लानत है ऐसे लोगों पर जिन्हें ऑस्ट्रेलिया में भारतियों पर लगातार हो रहे हमले दिखाई नहीं देते, जिन्हें वो बेरोजगारी नहीं दिखाई नहीं देती जो अन्दर ही अन्दर इस देश को खायी जा रही है |
लानत है ऐसे लोगों पर जिन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि कसाब का जुर्म क्या है, और उसे जल्दी से जल्दी सजा मिलनी चाहिए, उन्हें तो बस उसके धर्म को लेकर साम्प्रदायिकता फैलानी है | और कई तो ऐसे समझदार मुसलमान ब्लौगर भी है जो अपनी हर पोस्ट में केवल मज़हबी जिहाद कि बातें करते हैं|
लानत है ऐसे लोगों पर जो शायद धर्म का असली मतलब ही नहीं समझते और इसके लिए आपस में लड़ने-मरने को आमादा हैं |
अरे अगर आप प्यार का सन्देश नहीं दे सकते तो कम से कम नफरत तो न फैलाएं....
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PS :- अगर आपने ये पोस्ट नहीं पढ़ी है तो कृपया टिप्पणी देने का कष्ट भी ना करें.
Thursday, October 28, 2010
उदास हैं हम....
Monday, October 25, 2010
पहचानो तो जाने...
मेरी पिछली पोस्ट पर काफी गहमा गहमी रही | चलिए इस बहस को यहीं विराम देते हैं | आपके लिए आज एक चित्र पहेली लाया हूँ, क्या आप पहचान सकते हैं यह तीन महापुरुष कौन हैं ?
जरा मैं भी तो देखूं आपकी यादास्त.....चलिए अब ज्यादा नहीं लिखूंगा बाकी पहचानने के बाद | हाँ इस पोस्ट पर मोडरेशन लगाया गया है, सोमवार शाम को टिप्पणियाँ प्रकाशित की जाएँगी...
जरा मैं भी तो देखूं आपकी यादास्त.....चलिए अब ज्यादा नहीं लिखूंगा बाकी पहचानने के बाद | हाँ इस पोस्ट पर मोडरेशन लगाया गया है, सोमवार शाम को टिप्पणियाँ प्रकाशित की जाएँगी...
मेरे ब्लॉग सुनहरी यादें पर आज २ पुरानी रचनायें प्रकाशित हुई हैं उनपर भी नज़र डालते जाईयेगा....
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