Saturday, June 9, 2012

माफ़ करो इन्हें, ये तो इनके पढने-खेलने के दिन हैं...

           5 जून को दिए दिल्ली हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने 15 वर्ष की उम्र में हुए एक मुस्लिम लड़की के विवाह को जायज ठहराया..
वैसे भारतीय संविधान के हिन्दू मैरेज एक्ट के अनुसार विवाह की मानित उम्र लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 तय की गयी है... लेकिन इसमें मुस्लिम, पारसी, ईसाई और जेविश धर्म का जिक्र नहीं किया गया है... इस्लामिक क़ानून के मुताबिक़ कोई भी मुस्लिम लड़की बिना अपने माता-पिता की इजाज़त के शादी कर सकती है, बशर्ते उसने प्यूबर्टी हासिल कर ली हो. अगर उसकी उम्र 18 साल से कम भी है तो उसे अपने पति के साथ रहने का हक़ है... तो क्या भारतीय संविधान भी धर्म के हिसाब से शादी की उम्र तय करेगा... वैसे अगर दूसरे मुल्कों की बात करें तो मुस्लिम देशों को छोड़कर अधिकतर पश्चिमी देशों में विवाह की उम्र लडकों के लिए 18 और लड़कियों के लिए 16 है... हालाँकि एशिया महाद्वीप में अधिकतर जगह लड़कों के साथ-साथ लड़कियों की भी उचित उम्र 18 ही है... इरान में लड़कियों की न्यूनतम आयु 9 साल निर्धारित की गयी है और ब्रुनेई में तो इससे जुड़ा कोई नियम ही नहीं है यानी वहां बाल विवाह आज भी जायज है... ध्यान रहे कि आज से करीब एक साल पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में सुनाया था कि बिना माता-पिता की अनुमति की कोई भी लड़की 21 साल से कम की उम्र में विवाह नहीं कर सकती... वैसे अगर धर्म, प्रदेश का पक्ष हमलोग दरकिनार कर दें तो भी एक सवाल तो मेरे मन में उठ ही रहा है कि क्या 15 वर्ष की उम्र में विवाह उचित है... अगर हाँ तो इसे बाल विवाह की ही संज्ञा दे दें तो क्या गलत होगा... भले ही लड़की शारीरिक तौर पर थोड़ी तैयार हो लेकिन क्या वो मानसिक तौर पर विवाह की ज़ेम्मेदारियां उठा पाने में सक्षम होगी...बहरहाल उम्मीद करता हूँ इस फैसले का असर आने वाली शादियों पर तो नहीं पड़ना चाहिए... क्यूंकि इतनी कम उम्र में होने वाले विवाह की  संख्याओं में अब कटौती हो रही है और मेरे ख्याल से ऐसा होना भी चाहिए... भले ही कोर्ट ने १५ वर्ष की उम्र को विवाह के लिए पर्याप्त मान लिया हो लेकिन ये फैसला आपको करना है कि आप विवाह के लिए उचित अवस्था क्या मानते हैं..
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            भाई मेरा तो कहना है कि कानून कोई भी हो लेकिन उसके फायदे और नुक्सान पर भी गौर कर लिया जाना चाहिए... क्या 15 साल की उम्र भी कोई शादी की उम्र होती है... अरे ये पढने-लिखने और खेलने कूदने की उम्र होती है....

10 comments:

  1. बिलकुल सही कहा है, ये पढने-लिखने और खेलने कूदने की उम्र होती है शादी करके जिम्मेदारी उठाने की नहीं, कानून भी चला है छीनने बचपन को इन मासूमों से. माता-पिता को सोचना चाहिए क्या उनकी नन्ही सी बिटिया तैयार है इसके लिए....?

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  2. बहुत ही ज्वलंत विषय उठाया है आपने ..खेलने कूदने की उम्र में शादी कहाँ की समझदारी है

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  3. पता नहीं पर विश्व में माफ न करने वालों की संख्या कहीं अधिक है।

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  4. शादी की षी उम्र तो मानसिक और शारीरिक विकास और सोच के सही ढंग पर निर्भर करती है |जब अपना भला बुरा समझने की शक्ति विकसित हो जाए तभी शादी की सोचना चाहिये |लेख बहुत अच्छा है |
    आशा

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  5. भले ही कोर्ट ने १५ वर्ष की उम्र को विवाह के लिए पर्याप्त मान लिया हो लेकिन ये फैसला आपको करना है कि आप विवाह के लिए उचित अवस्था क्या मानते हैं...........सही कहा हैं आपने .....शादी करने से भी जरुरी पहले खुद को विकसित करना होता हैं ...शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को समृद्ध करने के बाद ही ...शादी का निर्णय सार्थक रहता हैं .........बहुत बढिया लेख

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. विश्व आगे बढ़ रहा है और भारत पीछे ...यही कहा जा सकता है

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  8. सच कहा है आपने ... कई बातें सभी तरह के क़ानून में एक सी होनि चाहियें ... आखित कार इंसान तो एक ही है ...

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  9. इसमें हिन्दू-मुस्लिम वाली कोई बात नहीं है.... हिन्दू सिविल कोड के मुताबिक भी 15 वर्ष की आयु के विवाह वैध माने गए हैं.... यह फैसला भी परिस्थितियों को देखते हुए ही हुआ होगा... हर बात को धर्म के चश्में से देखने सही नहीं है... और यह कहना भी मैं सही नहीं समझता हूँ कि सब के लिए एक जैसे कानून होने चाहिए.... अगर कोई मामला किसी धर्म से सम्बंधित है तो उसमें सबके लिए एक जैसे कानून कैसे हो सकते हैं?

    हालाँकि मेरा मानना भी यही है की आज की परिस्थितियों को देखते हुए विवाह की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए...

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    1. मुझे भी यही लगता है कि हर चीज़ को धर्म के चश्मे से देखना सही नहीं है... लेकिन दुःख इस बात का है कि इस्लाम में ऐसा कोई कानून क्यूँ नहीं है जो इतनी कम उम्र में विवाह होने को रोक सके...
      ये बात सिर्फ भारत में नहीं आप पूरी दुनिया में देख लीजिये अधिकतर मुसलमान देशों में विवाह की न्यूनतम आयु बहुत कम है... इतनी कम उम्र में एक मासूम की ज़िन्दगी का भविष्य तय करने वाले हम कौन होते हैं... अगर किसी एक ख़ास परिस्थिति में ऐसा निर्णय लेना पड़े तो अलग बात है लेकिन कुछ चीजें अदालत तक पहुँचती ही नहीं... न जाने कितनी ही लड़कियों की विवाह १८ वर्ष से कम उम्र में कर दिए जाते हैं... और हो सकता है ये बात आपको और कई लोगों को बुरी लगे लेकिन ऐसे मामलों में मुसलमानों का प्रतिशत कहीं ज्यादा है... ऐसा मैं नहीं, आंकड़े कहते हैं....

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