5 जून को दिए दिल्ली हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने 15 वर्ष की उम्र में हुए एक मुस्लिम लड़की के विवाह को जायज ठहराया..

. भाई मेरा तो कहना है कि कानून कोई भी हो लेकिन उसके फायदे और नुक्सान पर भी गौर कर लिया जाना चाहिए... क्या 15 साल की उम्र भी कोई शादी की उम्र होती है... अरे ये पढने-लिखने और खेलने कूदने की उम्र होती है....
बिलकुल सही कहा है, ये पढने-लिखने और खेलने कूदने की उम्र होती है शादी करके जिम्मेदारी उठाने की नहीं, कानून भी चला है छीनने बचपन को इन मासूमों से. माता-पिता को सोचना चाहिए क्या उनकी नन्ही सी बिटिया तैयार है इसके लिए....?
ReplyDeleteबहुत ही ज्वलंत विषय उठाया है आपने ..खेलने कूदने की उम्र में शादी कहाँ की समझदारी है
ReplyDeleteपता नहीं पर विश्व में माफ न करने वालों की संख्या कहीं अधिक है।
ReplyDeleteशादी की षी उम्र तो मानसिक और शारीरिक विकास और सोच के सही ढंग पर निर्भर करती है |जब अपना भला बुरा समझने की शक्ति विकसित हो जाए तभी शादी की सोचना चाहिये |लेख बहुत अच्छा है |
ReplyDeleteआशा
भले ही कोर्ट ने १५ वर्ष की उम्र को विवाह के लिए पर्याप्त मान लिया हो लेकिन ये फैसला आपको करना है कि आप विवाह के लिए उचित अवस्था क्या मानते हैं...........सही कहा हैं आपने .....शादी करने से भी जरुरी पहले खुद को विकसित करना होता हैं ...शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को समृद्ध करने के बाद ही ...शादी का निर्णय सार्थक रहता हैं .........बहुत बढिया लेख
ReplyDeleteविश्व आगे बढ़ रहा है और भारत पीछे ...यही कहा जा सकता है
ReplyDeleteसच कहा है आपने ... कई बातें सभी तरह के क़ानून में एक सी होनि चाहियें ... आखित कार इंसान तो एक ही है ...
ReplyDeleteइसमें हिन्दू-मुस्लिम वाली कोई बात नहीं है.... हिन्दू सिविल कोड के मुताबिक भी 15 वर्ष की आयु के विवाह वैध माने गए हैं.... यह फैसला भी परिस्थितियों को देखते हुए ही हुआ होगा... हर बात को धर्म के चश्में से देखने सही नहीं है... और यह कहना भी मैं सही नहीं समझता हूँ कि सब के लिए एक जैसे कानून होने चाहिए.... अगर कोई मामला किसी धर्म से सम्बंधित है तो उसमें सबके लिए एक जैसे कानून कैसे हो सकते हैं?
ReplyDeleteहालाँकि मेरा मानना भी यही है की आज की परिस्थितियों को देखते हुए विवाह की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए...
मुझे भी यही लगता है कि हर चीज़ को धर्म के चश्मे से देखना सही नहीं है... लेकिन दुःख इस बात का है कि इस्लाम में ऐसा कोई कानून क्यूँ नहीं है जो इतनी कम उम्र में विवाह होने को रोक सके...
Deleteये बात सिर्फ भारत में नहीं आप पूरी दुनिया में देख लीजिये अधिकतर मुसलमान देशों में विवाह की न्यूनतम आयु बहुत कम है... इतनी कम उम्र में एक मासूम की ज़िन्दगी का भविष्य तय करने वाले हम कौन होते हैं... अगर किसी एक ख़ास परिस्थिति में ऐसा निर्णय लेना पड़े तो अलग बात है लेकिन कुछ चीजें अदालत तक पहुँचती ही नहीं... न जाने कितनी ही लड़कियों की विवाह १८ वर्ष से कम उम्र में कर दिए जाते हैं... और हो सकता है ये बात आपको और कई लोगों को बुरी लगे लेकिन ऐसे मामलों में मुसलमानों का प्रतिशत कहीं ज्यादा है... ऐसा मैं नहीं, आंकड़े कहते हैं....